स्कूल के बस्ते से लेकर बुढापे की छडी तक ये हमेशा हमारा साथ देती है... परीक्षा हॉल से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक ये ही हमारा हौसला बढाती हैं... जी हां दोस्तों...! स्तों ये हिम्मत ही तो हैं, जो कभी भी हमारा साथ नही छोडती. किसी भी काम को करने से पहले हमारे इरादे बुलंद करने में हिम्मत का स्थान बडा ही महत्त्वपूर्ण होता हैं.
* संघर्ष से भरा हैं जीवन ! हर किसी के जीवन में कुछ क्षण ऐसे भी आते है, जहाँ निराशा के घने बादल हमे अंधकार की ओर ले जाने का पूरे जोरो-शोरो से प्रयास करते हैं. असफलता के कुछ पडाव ऐसे भी होते है, जहाँ से फिर खडा होना, आगे निकलना बेहद कठीण हो जाता है. समस्या, संघर्ष से भरे इस जीवन में बाधाए आना आम बात हैं. ऐसी स्थिति में अगर हमारे मन के भीतर छिपी ये हिम्मत ही चली जाये, तो शायद ही हमारा आगे बढ पाना असंभव हो जाएगा.
* हिम्मत के साथ होता हैं साहस ! पर्वत शिखर पर सफलतापूर्वक पहुंचने के बाद हमारे कई दोस्त अपनी उत्साह और आनंद से भरी छवी सभी के लिये प्रदर्शित करते हैं. विजय का आनंद प्रदान करनेवाला यह क्षण निश्चित ही प्रशंसा का हकदार होता है, लेकीन मेरा मानना हैं की, शिखर पर पहुंचने से अधिक महत्त्वपूर्ण क्षण वो होता है जब इस महान कार्य का प्रारंभ हुआ. आकाश को छुनेवाली पर्वत की ऊंचाई देख कर जो पहला कदम उठा था, वो था हिम्मत से भरा. मन में एक बार हिम्मत कर ली - ठान लिया तो फिर भय किस बात का...? हिम्मत के साथ साथ साहस भी तो आता हैं.
* गीता है हिम्मत, प्रेरणा और साहस का स्रोत सभी शास्त्रो - पुरानो में श्रीमद् भगवद्गीता का स्थान सबसे ऊंचा और सर्वश्रेष्ठ हैं. जीवन पथ पर दुविधा में फसे धनुर्धारी अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने किया हुआ पथदर्शन आज भी उतना ही काल सुसंगत हैं. गीता समस्त मनुष्य एवं युवाओं को जीवन की प्रेरणा और संघर्ष से लडने का बल देती हैं. भगवान श्रीकृष्ण के वचन तथा उनका अर्जुन से संवाद, हमें जीवन में नयी दिशा के साथ साथ उचित - अनुचित भाव, कर्तव्य की श्रेष्ठता को दर्शाता हैं.
* हिम्मत से बाधाएं होती हैं दूर ! दोस्तों, स्तों हम सभी का जीवन भी इसी प्रकार अनिश्चितता, संघर्ष और संभ्रम से भरा होता है. जीवन में समय, परिस्थिति चाहे हमारे विपरीत हो, हम पूरी हिम्मत के साथ उनका मुकाबला करने के लिये प्रतिज्ञाबध्द हैं. परम कर्तव्य तथा प्रयास करना तो हमारे हाथ हैं. कडे प्रयास करने के बाद, एक ना एक दिन तो सफलता मिलेगी. अर्थात सफल वही होता हैं, जो कभी असफल हुआ हो...! इसीलिए सबसे आवश्यक है हमारे भीतर बसी हिम्मत, साहस और कडे प्रयास. जो हिम्मत हार गया, समझो सब कुछ हार गया....!
धन्यवाद. **** - संदीप प्रभाकर कुलकर्णी, छत्रपति संभाजीनगर. **** (प्रस्तुत लेख आपको ठीक लगे, अच्छा लगे तो अवश्य शेअर करें)
