हर वर्ष सूरज की कठोर उष्णता और रसिले आम की सुगंध का अनुभव आया की हम समझ जाते है... की अब अक्षय तृतीया का त्योहार
आ गया है। सोना-चांदी एवं घर की खरीदारी तथा वाहनो की डिलिव्हरी लेने के लिए अक्षय तृतीया सबसे बडा शुभमुहूर्त है। लेकिन
इसके अतिरिक्त ऐसा बहोत कुछ हुआ है इस शुभमुहूर्त पर। एक नजर डालते है शास्त्र-पुराणो में घटी कुछ घटनाओं पर। इसके द्वारा
निश्चित ही हम इस त्योहार के महत्व को अच्छी तरह से जानेंगे नें ।
* माता गंगा जी का अवतरण :-
हमें पता है की, महान राजा भगीरथ ने माता गंगा को धरती पर लाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव के
आशीर्वाद और राजा भगीरथ के सफल तपस्या के कारण अक्षय तृतीया की तिथि पर माता गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी।
* कलयुग का आरंभ :-
धर्म शास्त्र और पुराण के अनुसार सतयुग, त्रेता और कलयुग का आरंभ इसी अक्षय तृतीया तिथि को हुआ था। द्वापर युग की समाप्ति भी
इसी दिन हुई थी।
* नृसिंह भगवान का अवतार :-
सतयुग में भगवान विष्णु ने मत्स्य, हयग्रीव, कूर्म, वराह और नृसिंह अवतार लिया था।
* वामन अवतार मे आए भगवान :-
त्रैतायुग में भगवान विष्णु ने वामन, परशुराम और भगवान श्रीराम के रूप में अवतार लिया।
* माता अन्नपूर्णा की पूजा :-
धर्म शास्त्र और पुराणों के अनुसार माता अन्नपूर्णा का जन्म भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। इस दिन हम माता अन्नपूर्णा की पूजा
करते है।
* अक्षय पात्र की प्राप्ति :-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के प्रमुख पात्र धर्मराज युधिष्ठिर को इसी अक्षय तृतीया के शुभदिन पर अक्षय पात्र की प्राप्ति
हुई थी। अक्षय पात्र की महानता ऐसी है की, ये पात्र कभी रिक्त नहीं होता।
* महाभारत काव्य की रचना :-
महर्षि वेदव्यास द्वारा महान काव्य महाभारत की रचना का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था।
* भगवान परशुराम जन्मोत्सव :-
शस्त्र और शास्त्र विद्या के महान ज्ञानी श्री परशुराम जी का जन्म भी आज ही के दिन हुआ ।
* महात्मा बसवेश्वर जयंती :-
मानवता का संदेश देनेवाले महान संत श्री बसवेश्वर जी की जयंति भी इसी दिन पर मनाते है।
(संकलन तथा संपादन - संदीप प्रभाकर कुलकर्णी)
9850826679