* धन्यवाद डॉक्टर साहब ! Thank You Doctor Sahab!
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@ संदीप प्रभाकर कुलकर्णी,
छत्रपति संभाजी नगर
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(Article On National Doctor's Day / Thanks To Doctor Sahab)
सोलापुर बस स्टैंड पर उस रात का वह प्रसंग मुझे हमेशा याद रहेगा। छोटे बच्चे को गोद में लेकर बैठी हुई माता और असहाय अवस्था में पास में ही खड़ा वह पिता। पैसे की कमी के कारण कोई कितना निर्बल हो सकता है, इस बात का दुखदायक क्षण मेरे सामने से जैसे गुजर रहा था। किंतु उस बच्चे की रोने की आवाज कोई सुन रहा था। कुछ ही क्षणों में वो भागता हुआ आया और उसने एक साथ तीन जीवों को जैसे जीवनदान दिया। रात के ठंड में सोलापुर बस स्टैंड पर कौन था वह। वह था मानवता का सेवक, स्वास्थ्य का रक्षक। जी हां, वह थे डॉक्टर साहब!
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बचपन से लेकर युवावस्था तक और युवावस्था से लेकर बुढ़ापे तक, हम कुछ कमाए या ना कमाए, हमारे पास अनुभवों का बड़ा खजाना अवश्य होता है। हर किसी का जीवन एक समान नहीं होता, तो फिर अनुभव भी एक समान कैसे हो सकते हैं। ठीक कहाँ ना मैने। ऐसे ही कुछ मीठे और कड़वे अनुभवों को लेकर हम धन्यवाद दे रहे है समस्त डॉक्टरों को। जिन्होंने किसी का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
* 1 जुलाई को मनाते है डॉक्टर्स डे
आज के इस दौर में हर एक दिन हमारे लिए कुछ न कुछ लेकर आता हैं। अभी कुछ दिन पहले पिता के सम्मान प्रति फादर्स डे मनाया गया। अब आनेवाले शनिवार, 1 जुलाई को देशभर के समस्त डॉक्टरों अर्थात चिकित्सकों के कार्य गौरव हेतु राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) मनाया जा रहा हैं। समाज को स्वस्थ एवं तंदुरुस्त रखने में समस्त डॉक्टर्स का महत्वपूर्ण तथा सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता है।
* डॉ. बी. सी. रॉय को समर्पित हैं यह दिवस
डॉ. बिधान चंद्र राय के गौरव में सम्पूर्ण देशभर में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। उनका मानव चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान रहा है। वे एक समय काल में बंगाल के मुख्यमंत्री पद पर भी विराजमान थे। हैं। महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ था। उनका देहान्त भी 1 जुलाई 1962 को ही हुआ । डॉ. बी. सी. रॉय द्वारा मानवता की सेवा में अभूतपूर्व योगदान के गौरव हेतु राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस यानी डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।
* सोलापुर बस स्टैंड पर मानवता का अनुभव
कुछ वर्ष पहले की बात है। यात्रा के दौरान समय पर न पहुंचने के कारण मुझे रात में सोलापुर बस स्टैंड पर बहोत देर रुकना पड़ा। ठंड का मौसम था। उसी समय मेरी नजर पड़ी एक असहाय माता पिता पर। उनके साथ एक छोटा बच्चा भी था। बच्चा बेहद कमजोर दिखाई दे रहा था। मैंने उसके पिता से पूछा, क्या हुआ है, इसकी तबियत ठीक नहीं है क्या? उसने कहां, जी हां। दस्त और उल्टी के कारण कमजोर हो गया है। अभी मेरे पास उतने पैसे भी नहीं है, की मैं इसे कही दाखिल कर सकू। हम इस शहर में पहली बार आ रहे है। हमे गुलबर्गा जाना है। मैंने उस पिता को धैर्य और हिम्मत से काम लेने को कहा। इसके अलावा मैं और कुछ करने के लिए असहाय था। कुछ ही दूरी पर बैठे एक सज्जन ने इस दृश्य को देखा और वो तेजी से हमारे पास आए।उन्होंने बच्चे की माता को धीरज देते हुए अपनी बैग से Sthethscop निकाला और बच्चे की जांच करने लगे। वे एक डॉक्टर थे। यात्रा के दौरान वे भी मेरी तरह अपने बस की प्रतीक्षा में स्टैंड पर रुके हुए थे। अपने बैग से जल संजीवनी का एक पैकेट निकाल कर उन्होंने बच्चे को पिलाने के लिए कहा। कुछ दवाएं दी। बच्चे को दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है, एक दो घंटों में सुधार आएगा, ऐसा बोलकर अपनी जेब से निकाले हुए कुछ पैसे भी उस असहाय पिता के हाथ में थमा दिए। मानवता का एक सुंदर उदाहरण मैने उस रात सोलापुर के बस स्टैंड पर अनुभव किया। समस्या में फसे उन माता पिता के लिए वे केवल डॉक्टर नहीं, किंतु ईश्वर का एक रूप थे। फिर मैंने भी कुछ खाने पीने का सामान और थोड़े पैसे उस पिता को दिए। बहोत समय के बाद उन्हें गुलबर्गा के लिए बस मिली। मैं और डॉक्टर साहब अब एक अच्छे मित्र बन गए थे।
* सकारात्मक और नकारात्मक भी...!
मैंने मेरे निजी जीवन में ऐसे कई डॉक्टर्स देखे है, जिन्हे उनके पेशंट ईश्वर की तरह मानते है। हॉस्पिटल में मिलने पर पहले उनके चरण स्पर्श करते है। अपने जन्मदिन पर उनसे आशीर्वाद पाने के लिए हॉस्पिटल पहुंच जाते है। कई ऐसे डॉक्टर्स देखे है, जो रात बेरात न देखते हुए अपने पेशंट की सहायता के लिए बरमूडा पर ही हॉस्पिटल में भागे दौड़े चले आते है। हॉस्पिटल से ठीक होने के बाद, अपने गांव वापस जाने के लिए कई गरीब पेशंट के पास पर्याप्त पैसे नही होते। ऐसे कठिन समय में डॉक्टर साहब अपनी ओर से सारी व्यवस्था करते है। अपने पास पड़ी हुई दवाएं निःशुल्क दे देते है। ये कुछ सकारात्मक बातें है, जो आपने भी निश्चित ही अनुभव की होगी। किंतु कुछ नकारात्मक बातें भी है, जो मानवता को अपमानित करती है। उन बातों का उल्लेख करने के लिए मुझे मेरा मन साथ नहीं देता।
* अवश्य विचार करें।
काल के अनुसार हर क्षेत्र में नए बदलाव हो रहे है। विज्ञान और तकनीक की सहायता से मानवी चिकित्सा संबंधी अत्याधुनिक संशोधन द्वारा आज हर रोग का उपचार संभव हो रहा है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मेरा देश प्रतिदिन एक एक शानदार कदम उठा रहा है। ऐसे में हम सभी एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनकर आगे आए तो वो बात सबसे बेहतर होगी। मानवता की सेवा में हम क्या योगदान दे सकते है, इस मुद्देपर अवश्य विचार करें ।
ईश्वर द्वारा निर्मित इस सृष्टि पर देवदूत के रूप में मानवजाति को जीवनदान देनेवाले सभी डॉक्टर्स को ढेर सारी शुभकामनाएं। समाज और मानवता को समर्पित अविरत कार्य के लिए मैं उन्हें लाख लाख धन्यवाद देता हुं।
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